Posts

Showing posts with the label bhakti path prakrit

श्रीसिद्धभक्ति - असरीरा जीवघणा उवजुत्ता

Image
श्रीसिद्धभक्ति अथ पौर्वाह्निक (अपराह्निक) आचार्य-वन्दना-क्रियायां पूर्वाचार्यानुक्रमेण, सकलकर्मक्षयार्थं भाव-पूजा-वन्दना-स्तव-समेतं श्रीसिद्धभक्तिकायोत्सर्गं कुर्वेऽहम्। (9 बार णमोकार) असरीरा जीवघणा उवजुत्ता दंसणे य णाणे य। सायार-मणायारा लक्खण-मेयं तु सिद्धाणं॥ 1॥ मूलोत्तर-पयडीणं बंधोदय-सत्त-कम्म-उम्मुक्का। मंगल-भूदा सिद्धा अद्ठ-गुणातीद-संसारा॥ 2॥ अट्ठविय-कम्म-वियला सीदीभूदा णिरंजणा णिच्चा। अट्ठ-गुणा किदकिच्चा लोयग्गणिवासिणो सिद्धा॥ 3॥ सिद्धा णट्ठट्ठमला विसुद्ध-बुद्धी य लद्धि-सब्भावा। तिहुअणसिर-सेहरया पसियंतु भडारया सव्वे॥ 4॥ गमणागमण-विमुक्के विहडिय-कम्म-पयडि-संघादा। सासय-सुह-संपत्ते ते सिद्धा वंदिमो णिच्चं॥ 5॥ जयमंगल-भूदाणं विमलाणं णाण-दंसणमयाणं। तइलोय-सेहराणं णमो सया सव्व-सिद्धाणं॥ 6॥ सम्मत्त-णाण-दंसण-वीरिय-सुहुमं तहेव अवगहण्णं। अगुरु-लघु-मव्वावाहं अट्ठ-गुणा होंति सिद्धाणं॥ 7॥ तव-सिद्धे णय-सिद्धे संजम-सिद्धे चरित्त-सिद्धे य। 'णाणम्मि दंसणम्मि य सिद्धे सिरसा णमस्सामि ॥ 8॥ इच्छामि भंते। सिद्ध-भत्ति-काउस्सग्गो कओ तस्सालोचेउं सम्म -णाण-सम्म-दंसण-सम्मचरित्त-जुत्ताणं,...