ऋद्धियों का वर्णन
ऋद्धियों का वर्णन जैन धर्म में गहन ध्यान और कठोर तपस्या के माध्यम से महान तपस्वियों और संतों (मुनि) द्वारा प्राप्त की गई 64 रिद्धियाँ (चौंसठ ऋद्धियाँ) अलौकिक और दिव्य शक्तियाँ हैं । ये 64 शक्तियाँ संतों को ज्ञान, उपचार और गति से संबंधित क्षमताएँ प्रदान करती हैं। तपश्चर्या को करने वाले मुनि अनेक प्रकार की ऋद्धियों के स्वामी हो जाते हैं। ऋद्धियों के आठ१ भेद हैं-बुद्धिऋद्धि, विक्रियाऋद्धि, क्रियाऋद्धि, तपऋद्धि, बलऋद्धि, औषधिऋद्धि, रसऋद्धि और क्षेत्रऋद्धि। बुद्धिऋद्धि के १८, विक्रिया के ११, क्रिया के २, तप के ७, बल के ३, औषधि के ८, रस के ६ और क्षेत्र ऋद्धि के २ ऐसे अवान्तर भेद ५७ होते हैं। बुद्धिऋद्धि के १८ भेद – अवधिज्ञान, मन:पर्ययज्ञान, केवलज्ञान, बीजबुद्धि, कोष्ठबुद्धि, पदानुसारिबुद्धि, संभिन्नश्रोतृत्व, दूरास्वादनत्व, दूरस्पर्श, दूरघ्राण, दूरश्रवण, दूरदर्शन, दशपूर्वित्व, चौदहपूर्वित्व, निमित्तऋद्धि, प्रज्ञाश्रमण, प्रत्येकबुद्धित्व और वादित्व। १. अवधिज्ञान – यह प्रत्यक्षज्ञान अन्तिमस्वंधपर्यन्त परमाणु आदि मूर्त द्रव्यों को जानता है। २. मन:पर्...